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Monday, August 26, 2013

बचपन-एक मासूम सी याद. 


बचपन का हर पल बहुत याद आता है,

हर वो बात जो आज भी दिल मे छुपी बैठी है,

यादो के झरोखों मे टकटकी लगे बैठी है,

क्या बात थी उस खट्टी-मीठी गोली मे ,

जो भाई से छीन कर खाई जाती थी,

क्या बात थी उस रोटी मे ,

जो सब के साथ चूर के खाई जाती थी,

हर शाम खेल ने निकल जाना,

पुरे मोहले मे उधम मचाना,

हर सुबह भाई का हाथ पकड़ स्कूल जाना,

स्कूल मे  होम वर्क के लिये दोस्तों से कॉपी मागना 

सर्दी होने पर स्कूल न जाना के लिए,बुखार का बहाना  बनाना,

टाइम निकल जाने पर,उठ खड़े होना,

माँ के साथ बाज़ार जाना,

और हर नए खिलोने की जिद करना,

पापा के आने पर दीदी से लड़ाई बंद कर पठने  बेठना ,

और हम है अच्छे बच्चे ये जताना ,

नींद खुलने से पहले माँ का चाय लाना,

सफाई के लिए बहन को बोल  देना,

छुट्टियों मई घंटो दोस्तों के साथ खेलना,

होली पर जम  कर गीले होना,

दिवाली मे रात भर जागना ,

हर त्यौहार बिना चिंता के मनाना ,

यही है सब के बचपन का ज़माना ,

"विद्या"




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