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Friday, March 7, 2014


  नारी के रूप अनेक…………   

हे नारी तेरे कितने हैं रूप ,हर रूप में है तू बहूत  खूब ,

बेटी बन के हर घर को महकाती ,

पिता कि हर बात को सराहती ,

माँ के दर्द पे,प्यार का मलहम लगाती,

बहन बन भाई की कलाई पर,खुशियाँ  बांधी,

किसी  कि जो बनी तू जीवनसाथी,

हर तूफ़ा में उस के साथ रहती ,

माँ बन जीवनदायनी  तू बनती,

सारा संसार का प्यार उस पर  लुटाती, 

हे नारी तेरे कितने हैं रूप ,हर रूप में है तू बहूत  खूब ,

                                                                                   "विद्या"