नारी के रूप अनेक…………
हे नारी तेरे कितने हैं रूप ,हर रूप में है तू बहूत खूब ,
बेटी बन के हर घर को महकाती ,
पिता कि हर बात को सराहती ,
माँ के दर्द पे,प्यार का मलहम लगाती,
बहन बन भाई की कलाई पर,खुशियाँ बांधी,
किसी कि जो बनी तू जीवनसाथी,
हर तूफ़ा में उस के साथ रहती ,
माँ बन जीवनदायनी तू बनती,
सारा संसार का प्यार उस पर लुटाती,
हे नारी तेरे कितने हैं रूप ,हर रूप में है तू बहूत खूब ,
