" उम्मीद-क्यू ? "
क्यू किसी से उम्मीद रखता है इंसा , क्या हर उम्मीद पर खरा उतरता है इंसा ,
किसी से है कम उम्मीद तो किसी से बहुत उम्मीद ,
क्यू इंसा दुसरे को कैदी बना देता है,
कम उम्मीद वाला बहुत कर दे तो हो ना भरोसा,बहुत वाला कम कर दे तो ,क्या करे इंसा? ,
ये भी तो हो सकता है,उम्मीद करे ही ना इंसा ,
क्यू हम हर स्थति मे किसी विशेष से उम्मीद लगा लेते है,
खरा न उतरने पर दिल को दगा दे बैठते है,
रिश्तो की ड़ोर को ना बाधो ,उम्मीद से,हर रिश्ते को आजाद छोड़ दो प्यार से,
ना हो कोई रिश्ते का आधार "उम्मीद"
प्यार मे कर गुज़रने की नहीं कोई सीमा,दिल मे ना रखो किसी के लिए कोई "उम्मीद"
"विद्या"
