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Thursday, September 19, 2013

swa;kranti

हर ओर तबाही  हुई ,क्यों  आज ये भारत पर आफत आई ,

हर और महंगाई की मार है,स्त्री का चीर हरण चारों  और है,

हर और युवा बेकार है,नौकरी की मारम -मर है,

गूंगी-बहरी सरकार है,

रूपया तो गिरा  सो गिरा ,मानवता भी खामोश है,

रॉकेट तो बहुत उड़ा लिए ,गरीब का पेट तो खाली  ही है,

सीमा पर क्यू हर कोई धाक जमाता है,?

काटे जिसने हमारे जवानों के धड़ है,

क्यों उन के लिए हम खामोश है,

कहाँ गया वो कारगिल वाला जज़्बा ,

क्या इतनी डरपोक हमारी  सरकार  है,??

सालो पहले लडे  जो फिरंगियों से,

आज क्रांति अपने आप से है,

जागो  और दिखा दो इस  दुनिया को,

खुशिया लाना हमारे हाथ मे  है. ………… 









Tuesday, September 17, 2013

natkhat.....bacpan

नटखट-बचपन 


याद है आज भी वो बचपन के नटखट भरे दिन,

नहीं रहते थे बिना खेले एक भी दिन,

बारिश के पानी मै हमारा भी जहाज ,गोते खाता था,

पेल-दूज खेल कर तो मन न भरा करता था,

क्रिकेट हो या घर-२ का खेल,

सब खेलो मे  हाथ आजमाते थे,

पूरी कॉलोनी को छुपम-छुपाई का घर बना लेते थे,

कब बजेगे घडी मे शाम के 5 ,

इसी का   करते रहते थे इंतजार,

हार  जाने पर भी न रोया करते थे,

बस दोस्तों के जीत की ही ख़ुशी मानते थे,

मस्ती का तो कोई नहीं अन्त  था,

बचपन का ज़माना ही कुछ और था.…. "विद्या"