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Thursday, October 11, 2012

उस की जादुई नज़र ...................

पता नहीं क्या जादू होता है उस साथी की नज़र मे की,

सारी  ज़िन्दगी उस की पलकों की छाया मे,

रहने को बेताब रहता है मन,

क्यू है ऐसा दीवानापन?उस की हर बात मीठी लगे,

उस के  साथ हर लम्हा सुहाना लगे ,

उस के साथ साल भी एक पल लगे,

उस साथी की जुदाई तो हर पल भी सालों लगे,

पता नहीं क्या जादू है उस की एक नज़र मे,

 हम ने उसे चाहा दिलोजान से,

उस ने भी हमे देखा प्यार से,ज़िन्दगी हमारी खिल गई बहार से,


मेरा हर गम अपने गले से लगाया ,खुद की हर ख़ुशी हमे दी उपहार मे ,

ऐसा लगे जैसे रब ने उसे भेजा है सिर्फ हमारे ही लिए,

बिन कहे हर बात समझ जाता है वो,सब के लिए हर पल ख़ुशी ही लाता है वो,

उस की सादगी  ने हमें भी नरम  बना दिया ,हर लम्हा प्यार से रहना सीखा दिया ,

पता नहीं क्या जादू है उस की एक नज़र मे,

उस के जैसा साथी कोई नहीं ,उस के जैसा साथ कोई नहीं,

उस के साथ,विराना भी आबाद लगे,पतझड़ भी गुलशन लगे,

उस का साथ ऐसा की हर राह भी मंज़िल लगे,और सुखा भी सावन लगे ,

पता नहीं क्या जादू है उस की एक नज़र मे,

 मेरी दुनिया को रंगीन बना दिया,सारी कायनात को चमन बना दिया ,

इस  कदर  आये वो मेरी ज़िन्दगी मे,पल-पल को हसीं बना दिया'

शब्द कम है मेरे प्यार को बय़ा करने  को,प्यार भरा, रब को शुक्रिया  अदा करने को,

पता नहीं क्या जादू है उस की एक नज़र मे,नज़र मे,

नज़र मे,

                                           नज़र मे ...........................................

"विद्या"




Saturday, October 6, 2012

"नारी" .................एक तलाश ख़ुशी के लिये

ना करो नारी का अपमान, जहाँ हुआ नारी का उपहास ,वहां  है सिर्फ शेतानो का वास,

हर आदमी को जीवन देने वाली नारी है, पत्थर को इंसा बनाने वाली भी नारी है,

ख़ामोशी पर  न गौर करो, ये एक शांत ज्वालामुखी है,

जब भी होगा असुर का वार, ये लगी दुर्गा अवतार,

क्यू करते हो इस  पर  हर पल प्रहार, ये ही तो  लाती  है आप के जीवन मे बहार,

हर पल कही नारी की लज्जा छिनी जाती है, दहेज़ के लिए जिन्दा जलाई जाती है,

पैदा होते ही जिन्दा फ़ेकी जाती है, किताब की जगह चूल्हे मे झोंकी जाती है ,

पता नहीं कैसे इतनी यातना सह पाती  है,

नारी केवल दूसरो के लिए ही जीती है, पहले माँ-पिता के लिये जीती,

फिर पति-बच्चो के  लिए मरती है,



कोई मुझे एक बार बता दे, आखिर है क्या नारी की गलती,

जो उसे हजारो सजाये दी जाती,


हे आदमी! नारी की महानता को पहचान ले, अपनी गलतियों को सुधारले,

मेरी सब से है यही प्रार्थना , हर नारी के लिये हो सम्मान भरा रास्ता,

उसे भी हो हक़ बेखोफ जीने का, अपने लिए खुशियों भरी राह चुनने का

नारी है रब का दूसरा रूप , लक्ष्मी का ही है  स्वरुप

नारी को जो देगा सम्मान, उसी के जीवन मे होगा खुशियों का संचार ..........

"विद्या"



Wednesday, October 3, 2012

उड़ान ..........

आसमाँ को कहो थोडा और ऊंचाई पर चला जाये ............

मुझे और ऊँचाइयों को छूना हैं ...........

होंसलो की कमी नहीं हैं , सब इरादों को पूरा करना हैं ...............

खुद पर गर हो भरोसा तो ..........

जिंदगी के सब सपने अपने सच होंगे ..........

खुशियों का तो क्या फिर तो सारे गम भी हमारे दोस्त होंगे ..................


"विद्या" 


उड़ान 

बस, तुम ही तो हो..........



सुबह की नरम फिज़ाओ मे तुम हो,सर्दी की नरम धुप मे तुम हो

बारिश की हर बूंद मे तुम हो,रात की चांदनी मे तुम हो,

इस तरह हमें न देखिये ,मेरी हर नज़रमे ही तुम हो,

क्यों किसी और को हम चाहे,जब मेरी तो हर धड़कन मे  ही तुम हो

मेरी हर दुआ मे  तुम हो,रब की छाया भी तुम हो,

मेरी मुस्कराहट मे  तुम हो,मेरी हँसी मे भी  तुम हो,

शीतल जल की ठंडक तुम हो,ओस की बूंद के समान कोमल तुम हो,

मेरी सांसे तुम हो,मेरी जान तुम हो ,

फूलो की महक मे  तुम हो,शमा की रोशनी मे  तुम हो,

सागर की लहरों मे तुम हो,मेरे पहले प्यार के एहसास मे  तुम ही हो,

बहते पानी की तरह निश्छल तुम हो,प्यार की तरह पवित्र तुम हो,

मेरे हर पल मे,हर खवाहिश मे,हर सपने मे तुम ही तुम हो,

और कोई  किसी को किस तरह चाहे .............

मेरे  तो हर ख्याल मे  तुम हो,तुम हो,तुम  हो'''''''''''''

 बस तुम ही तो हो,........................... "विद्या"


 

Thursday, September 27, 2012

खुद से ऊपर उठ कर सोचो............



बालू रेत के जैसे ये जीवन तेरे हाथ से फिसलता चला जायेगा और तुझे पता भी नहीं चलेगा,
तुने पूरी ज़िन्दगी क्या किया .......... केवल खुद के लिए जिया,
खुद के लिए पैसा कमाया ,खुद के लिए नाम कमाया, 
तुझे भगवान  ने सब दिया,कभी सोचा है तुने दूसरो के लिए क्या किया,
कभी किसी भूखे को रोटी खिलाई ,कभी किसी जरूरतमंद की मदद की,
नही.........................करता भी कैसे, तुझे तो खुद के  लिए जीने मे ही आनद जो आ रहा था............
हे इन्सान अब तो खुद से ऊपर उठ जा और उन के लिए कुछ कर 
जिन्हें भगवन ने बना तो दिया है पर  किस्मत लिखनी ही भूल गया,
चल आज से ही एक प्रयोग कर शाम को किसी एक गरीब को खाना खिला देना
फिर देख तेरे को वो सुकून मिलेगा जिस की तलाश तु आज तक कर रहा था...............
सही मे  रात को अच्छी नींद आयेगी,वैसे सच कहू तो ये मैंने भी कुछ दिन पहले ही प्रयोग किया है,
ये एक दिन की आदत अपने आप ही आप के जीवन मे शामिल होती चली जाएगी,
तब आप को भी एहसास होगा की जिस भगवान ने मुझे सब कुछ दिया उस का मै शुक्रिया अदा कर सका...
और उन लोगो की मदद कर सका जिसे भगवन कुछ देना भूल गया था 
और आप उस ईश्वर के बन्दे बन कर उस की कमी को पूरी कर सके ............................
तो आज से ही कुछ ऐसा करे जो दूसरो की ख़ुशी के लिए हो ....................
खुद..................के लिए नहीं..............................."विद्या " 

Monday, September 24, 2012

अंतर ............................. क्यूँ ????????

मुझे ये सोच कर रोना आता हे, लड़की हुई तो उदास हो गए 

लड़का हुआ तो झूम उठे, खुशियों का कोई ठिकाना ही नहीं रहा, 

बेटी हुई तो रो रो कर बुरा हाल हे, जैसे जिंदगी से खुशियों का कोई नाता ही नहीं रहा, 

इन दोनों बातों में वाकई कितनी कडवी सच्चाई हैं, 

या खुदा की इन दोनों नेमतो में वाकई इतना अंतर हे 

या सिर्फ हम लोगों ने ही ये अंतर पैदा किया हे......................

मुझे कोई ये बता दे के एक औरत की ज़िंदगी में माँ  बनना ज़रूरी हैं 

या फिर एक बेटे की माँ ..................

मेरा तो दिल कहता हे कि माँ बनना ही एक पूरा एहसास हे ....................

बेटियाँ तो वो प्यारी मुस्कुराहट हे जो पुरे घर को अपने चंचल मन से भर देती हे, 

में तो उन लोगों पर तरस खाती हूँ जो बेटे और बेटी को अलग नज़र से देखते हे, 

क्यूँ आज भी ये समाज पुरानी रीतियों में जकड़ा हैं ...............

अगर सही तरह से सोचो कोई अंतर नहीं हैं ..............



बल्कि आपके दर्द को जो अपना समझे वो बेटी हैं ...............

दो दो घरों परिवारों को संभाले वो बेटी हैं ..................

पराई कहे जाने पर भी एक आवाज में दोड़ी आती हे वो बेटी हैं ......................

चार दिवारी के मकान को घर बनाये वो बेटी हैं .............................

अपने दर्द को छुपा कर खुशियाँ बांटे वो बेटी हैं ....................

बंद करो ये बेटा बेटी का नाटक ...................

सारी जिंदगी जो दूसरों के लिए जिये वो बेटी हैं ..................बेटी हैं ....................बेटी हैं ..........

फिर भी इतना अंतर ............................. क्यूँ ????????????????????? 

                                                                                                                                    "विद्या"

Sunday, September 23, 2012

बेटी की क्यूँ होती हे............"विदाई"

"VIDAI"

 

                   
क्यूँ होती हे बेटी की "विदाई", 

बचपन जिस घर में बिताया

हुई वहीँ से पराई ...........

बेटी की विदाई पर क्यूँ देते हे सब "बधाई" 

ईश्वर ने ये कैसे रीत बनायीं 

उस पल का दर्द एक बेटी ही जान पायी 

बेटो में तो सहनशीलता इसलिए ही नहीं बनायीं 

पराये घर को भी अपना बना कर उस में सारी जिंदगी बितायी 

उन लोगों की खुशियों को ही अपनी जिंदगी बनायीं 

पापा की डांट हर पल याद आयी 

माँ की छाया भी हुई परायी 

जाने बेटी की क्यूँ  होती हे "विदाई"


"विद्या "

          

दुआ............तेरे लिये!!!!!!!!!

दुआ............तेरे लिये!!!!!!!!!


तन्हाइयों  में रहना आसां नहीं, तेरी यादों की छाया जो हैं.......

तेरे बिना रह तो ले हम मगर तेरी परवाह जो हैं.......

तुझे भुला कर कहाँ जाये,इस दिल की हर धड़कन में ही तूहैं....... 

सुबह की ओस सी तेरी मुस्कान, दिल में सुकुन भर देती हैं....... 

तेरी यही अदा तो हमें भाती हैं, 

तेरी महक ही इन तन्हाइयों को मिटा देती हैं, 

जिंदगी में तुम्हें पा लिया तो और क्या चाहिये.........

बस सारी खुशियाँ रब तुम्हें दे दे .............



 यही दुआ..........तेरे लिए..........."विद्या"