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Thursday, September 27, 2012

खुद से ऊपर उठ कर सोचो............



बालू रेत के जैसे ये जीवन तेरे हाथ से फिसलता चला जायेगा और तुझे पता भी नहीं चलेगा,
तुने पूरी ज़िन्दगी क्या किया .......... केवल खुद के लिए जिया,
खुद के लिए पैसा कमाया ,खुद के लिए नाम कमाया, 
तुझे भगवान  ने सब दिया,कभी सोचा है तुने दूसरो के लिए क्या किया,
कभी किसी भूखे को रोटी खिलाई ,कभी किसी जरूरतमंद की मदद की,
नही.........................करता भी कैसे, तुझे तो खुद के  लिए जीने मे ही आनद जो आ रहा था............
हे इन्सान अब तो खुद से ऊपर उठ जा और उन के लिए कुछ कर 
जिन्हें भगवन ने बना तो दिया है पर  किस्मत लिखनी ही भूल गया,
चल आज से ही एक प्रयोग कर शाम को किसी एक गरीब को खाना खिला देना
फिर देख तेरे को वो सुकून मिलेगा जिस की तलाश तु आज तक कर रहा था...............
सही मे  रात को अच्छी नींद आयेगी,वैसे सच कहू तो ये मैंने भी कुछ दिन पहले ही प्रयोग किया है,
ये एक दिन की आदत अपने आप ही आप के जीवन मे शामिल होती चली जाएगी,
तब आप को भी एहसास होगा की जिस भगवान ने मुझे सब कुछ दिया उस का मै शुक्रिया अदा कर सका...
और उन लोगो की मदद कर सका जिसे भगवन कुछ देना भूल गया था 
और आप उस ईश्वर के बन्दे बन कर उस की कमी को पूरी कर सके ............................
तो आज से ही कुछ ऐसा करे जो दूसरो की ख़ुशी के लिए हो ....................
खुद..................के लिए नहीं..............................."विद्या " 

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