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Saturday, July 27, 2013


"नादानी "


वो हमे नादां समझते है,हम भी अनजान हो जाते है,उनकी एक मुस्कराहट के लिए,

हमारी नादानी से उनके लबों पर आई हँसी,

तो इस नादानी को हमने ख़ुद के अन्दर ही समाई,

है,अनमोल हमारे लिए उनकी मासूम सी एक हँसी,

उसके लिए लाखो बार निभाई नादानी,

उन्हें लगता है हम कुछ नहीं समझते,

सच तो ये है मेरी "जान",

वो  हमारी नज़रो को नहीं समझते,

पढ़ लिया ग़र,कभी हमारे चेहरे को,

हमारी नादानी मे,खुद की नादानी तलाशोगे,

हम तो उनके  के प्यार के क़ायल है,

और वो  हमे  समझते पागल है :)

"विद्या"


NE:SHABAD........


"नि:शब्द"


आप की ये अनन्त सादगी ,प्यार भरा सुन्दर मन ,

आखों मे प्यार निश्छल,

आप के लिए ही है ,मेरा कल ,आज और कल,

आप की याद मे गुज़रता है हर पल

काश ,हम ज़रा भी आप जैसे हो पाते,

हर मोसम को हँसी से झेल पाते,

सभी की ज़िन्दगी मे साथी,आप जैसे नहीं आते,

आप जैसो के लिए ,लोग मन्नते है मागंते,

आप की हर बात मे शरारत,नज़रो से भी प्यार भरी शरारत,

मन मे ही मुस्कराते है,अच्छी लगती है शरारत,

आप की खूबियों के लिए कम है सारी,वर्णमाला,

बाकी नहीं है कोई शब्द,

हो गई हू मै "नि:शब्द"

मुझे अपने आप मे बसा लो,हो न पाए कोई गम का अहसास,

सरे जहां मे हो आप मेरे लिए सब से "खास"

"विद्या"

Wednesday, July 24, 2013

"कोई तो रोक लो "        

चारों और है कालीघटा छाई,आसमा मे अधियारी छाई,

क्यू लग रहा है भय,आज दुनिया की शामत आई,

जोर-२ से हवा है कह रही, कुदरत को तुम्ही ने  किया है नष्ट,कही ये कर ना दे

आज दुनिया को  ही नष्ट,

अभी भी है समय,मांग ले प्रकृति से छमा,

हे इंसा कर वृषो की रक्षा,पर्वत है तेरे पिता,और धरती है माँ सीता,

रोकना है ग़र नदियों के इस तूफ़ा को,पाक़ ही रख दरिया के पानी को,

रोक अपने सम्पन्ता के लालच को,और मत काट जगंल को,

जब होगा साँस लेना दुर्भर,कहाँ खोजेगा अपनी इस सम्पन्ता को,

हे इंसा संभल जा ,समझ कुदरत के इशारे को,

इंसा ही इंसा को बतलायेगा,नहीं कोई दूसरी दुनिया से आएगा,

है ये धरती ही अपनी माँ,माँ बिना हम सब को कौन सभाल पायेगा??????????