"नादानी "
वो हमे नादां समझते है,हम भी अनजान हो जाते है,उनकी एक मुस्कराहट के लिए,
हमारी नादानी से उनके लबों पर आई हँसी,
तो इस नादानी को हमने ख़ुद के अन्दर ही समाई,
है,अनमोल हमारे लिए उनकी मासूम सी एक हँसी,
उसके लिए लाखो बार निभाई नादानी,
उन्हें लगता है हम कुछ नहीं समझते,
सच तो ये है मेरी "जान",
वो हमारी नज़रो को नहीं समझते,
पढ़ लिया ग़र,कभी हमारे चेहरे को,
हमारी नादानी मे,खुद की नादानी तलाशोगे,
हम तो उनके के प्यार के क़ायल है,
और वो हमे समझते पागल है :)
"विद्या"
No comments:
Post a Comment