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Thursday, August 1, 2013

ichha........

इच्छा vs जिद्द 

           इच्छा और जिद्द  मे है बहुत महीन फासला,

इच्छा चाहती है सब की ख़ुशी,

तो जिद्द मागंती है केवल खुद की ख़ुशी,

इच्छा मे है एक मासूम सी सादगी,

तो जिद्द मे है एक तरह की दरिंदगी,

इच्छा कहती है काश मेरे  मन का हो,

जिद्द कहती है किसी भी हालत मे,बस उसी के मन का  हो,

यही है बस हमारा कहना,हर काम प्यार से करना,

जिद्द करके किसी रिश्ते को हासिल मत करना,

हर बात मे  जिद्द अच्छी  नहीं,

जिद्द से रिश्तो की डोर पक्की नहीं,

इच्छा मे  है कोशिश का साथ,आप के अपने होंगे आप  के साथ . 

"विद्या"


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