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Wednesday, July 24, 2013

"कोई तो रोक लो "        

चारों और है कालीघटा छाई,आसमा मे अधियारी छाई,

क्यू लग रहा है भय,आज दुनिया की शामत आई,

जोर-२ से हवा है कह रही, कुदरत को तुम्ही ने  किया है नष्ट,कही ये कर ना दे

आज दुनिया को  ही नष्ट,

अभी भी है समय,मांग ले प्रकृति से छमा,

हे इंसा कर वृषो की रक्षा,पर्वत है तेरे पिता,और धरती है माँ सीता,

रोकना है ग़र नदियों के इस तूफ़ा को,पाक़ ही रख दरिया के पानी को,

रोक अपने सम्पन्ता के लालच को,और मत काट जगंल को,

जब होगा साँस लेना दुर्भर,कहाँ खोजेगा अपनी इस सम्पन्ता को,

हे इंसा संभल जा ,समझ कुदरत के इशारे को,

इंसा ही इंसा को बतलायेगा,नहीं कोई दूसरी दुनिया से आएगा,

है ये धरती ही अपनी माँ,माँ बिना हम सब को कौन सभाल पायेगा??????????




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