ना करो नारी का अपमान, जहाँ हुआ नारी का उपहास ,वहां है सिर्फ शेतानो का वास,
हर आदमी को जीवन देने वाली नारी है, पत्थर को इंसा बनाने वाली भी नारी है,
ख़ामोशी पर न गौर करो, ये एक शांत ज्वालामुखी है,
जब भी होगा असुर का वार, ये लगी दुर्गा अवतार,
क्यू करते हो इस पर हर पल प्रहार, ये ही तो लाती है आप के जीवन मे बहार,
हर पल कही नारी की लज्जा छिनी जाती है, दहेज़ के लिए जिन्दा जलाई जाती है,
पैदा होते ही जिन्दा फ़ेकी जाती है, किताब की जगह चूल्हे मे झोंकी जाती है ,
पता नहीं कैसे इतनी यातना सह पाती है,
नारी केवल दूसरो के लिए ही जीती है, पहले माँ-पिता के लिये जीती,
फिर पति-बच्चो के लिए मरती है,
कोई मुझे एक बार बता दे, आखिर है क्या नारी की गलती,
जो उसे हजारो सजाये दी जाती,
हे आदमी! नारी की महानता को पहचान ले, अपनी गलतियों को सुधारले,
मेरी सब से है यही प्रार्थना , हर नारी के लिये हो सम्मान भरा रास्ता,
उसे भी हो हक़ बेखोफ जीने का, अपने लिए खुशियों भरी राह चुनने का
नारी है रब का दूसरा रूप , लक्ष्मी का ही है स्वरुप
नारी को जो देगा सम्मान, उसी के जीवन मे होगा खुशियों का संचार ..........
"विद्या"

Nari Shakti Ki Jai Ho.........Yatra Nari pujyate tatra Devta ramiyante........
ReplyDeleteit's very true Dr.shreya...........my dear frd.
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