हर ओर तबाही हुई ,क्यों आज ये भारत पर आफत आई ,
हर और महंगाई की मार है,स्त्री का चीर हरण चारों और है,
हर और युवा बेकार है,नौकरी की मारम -मर है,
गूंगी-बहरी सरकार है,
रूपया तो गिरा सो गिरा ,मानवता भी खामोश है,
रॉकेट तो बहुत उड़ा लिए ,गरीब का पेट तो खाली ही है,
सीमा पर क्यू हर कोई धाक जमाता है,?
काटे जिसने हमारे जवानों के धड़ है,
क्यों उन के लिए हम खामोश है,
कहाँ गया वो कारगिल वाला जज़्बा ,
क्या इतनी डरपोक हमारी सरकार है,??
सालो पहले लडे जो फिरंगियों से,
आज क्रांति अपने आप से है,
जागो और दिखा दो इस दुनिया को,
खुशिया लाना हमारे हाथ मे है. …………
गूंगी-बहरी सरकार है,
रूपया तो गिरा सो गिरा ,मानवता भी खामोश है,
रॉकेट तो बहुत उड़ा लिए ,गरीब का पेट तो खाली ही है,
सीमा पर क्यू हर कोई धाक जमाता है,?
काटे जिसने हमारे जवानों के धड़ है,
क्यों उन के लिए हम खामोश है,
कहाँ गया वो कारगिल वाला जज़्बा ,
क्या इतनी डरपोक हमारी सरकार है,??
सालो पहले लडे जो फिरंगियों से,
आज क्रांति अपने आप से है,
जागो और दिखा दो इस दुनिया को,
खुशिया लाना हमारे हाथ मे है. …………
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