" मासूम सी याद "
बचपन का हर पल बहुत याद आता है ,हर वो बात जो आज भी दिल मे छुपी हुई है,
यादो के झरोखों मे टकटकी लगाये हुई है,क्या बात थी उस खट्टी मीठी गोली मे ,
जो भाई से छीन कर खाई जाती थी,क्या बात थी उस रोटी मे ,
जो सब के साथ चूर के खाई जाती थी ,हर शाम खेलने निकल जाना,
पुरे मोहल्ले मे बड़ी धूम मचाना,हर सुबह भाई का हाथ पकड़ स्कूल जाना,
स्कूल मे होम वर्क के लिए दोस्तों की कॉपी मागना,
ठण्ड होने पर स्कूल ना जाने के लिए बुखार का बहाना बनाना,टाइम निकल जाने पर खड़े हो जाना,
माँ के साथ बाहर जाने पर नए -२ खिलोनो की ज़िद्द करना ,
पापा के आने पर बहन से लड़ाई बंद कर,पढने बेढं जाना,
और हम है अच्छे बच्चे ये जताना,नींद खुलने से पहले माँ का चाय लाना,
गर्मी की छूटी मे घंटो दोस्तों के साथ खेलना,सफाई के लिए बहन को बोल देना,
होली मे सब के टाइटल देना,जी भर कर गीले होना,और दिवाली मे रात भर जगाना,
यही है हमारे "बचपन" का ज़माना ,ज़िन्दगी भर मुश्किल है इसे भुला पाना,,,,,,,,,,,,,,,"विद्या"

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