सुबह की नरम फिज़ाओ मे तुम हो,सर्दी की नरम धुप मे तुम हो
बारिश की हर बूंद मे तुम हो,रात की चांदनी मे तुम हो,
इस तरह हमें न देखिये ,मेरी हर नज़रमे ही तुम हो,
क्यों किसी और को हम चाहे,जब मेरी तो हर धड़कन मे ही तुम हो
मेरी हर दुआ मे तुम हो,रब की छाया भी तुम हो,
मेरी मुस्कराहट मे तुम हो,मेरी हँसी मे भी तुम हो,
शीतल जल की ठंडक तुम हो,ओस की बूंद के समान कोमल तुम हो,
मेरी सांसे तुम हो,मेरी जान तुम हो ,
फूलो की महक मे तुम हो,शमा की रोशनी मे तुम हो,
सागर की लहरों मे तुम हो,मेरे पहले प्यार के एहसास मे तुम ही हो,
बहते पानी की तरह निश्छल तुम हो,प्यार की तरह पवित्र तुम हो,
मेरे हर पल मे,हर खवाहिश मे,हर सपने मे तुम ही तुम हो,
और कोई किसी को किस तरह चाहे .............
मेरे तो हर ख्याल मे तुम हो,तुम हो,तुम हो'''''''''''''
बस तुम ही तो हो,........................... "विद्या"
mai mare maan ki baat zuba se jada sabdo mai baya kar sakti hu........
ReplyDeleteAur mein to meri aankho se hi bayan kar deta hu...........
DeleteMaan Gaye......vah vah vah!!!!!!!!!!
ReplyDeletesahi kaha aapne vidhya ji, ham apni koi bhi baat juba se jyada shabdo me ya khamosh rahakar baya kar sakte h.
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