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Wednesday, October 3, 2012

उड़ान ..........

आसमाँ को कहो थोडा और ऊंचाई पर चला जाये ............

मुझे और ऊँचाइयों को छूना हैं ...........

होंसलो की कमी नहीं हैं , सब इरादों को पूरा करना हैं ...............

खुद पर गर हो भरोसा तो ..........

जिंदगी के सब सपने अपने सच होंगे ..........

खुशियों का तो क्या फिर तो सारे गम भी हमारे दोस्त होंगे ..................


"विद्या" 


उड़ान 

4 comments:

  1. yeh line aapne likhi h to bahut acchi h, our aapne nahi bhi likhi h to bhi acchi h

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    1. ye sari poetry maine khud hi likhi hai...........self writtern hai............

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